तक्षशिला पब्लिकेशन एवं इकतारा तक्षशिला का बाल साहित्य एवं कला केन्द्र

बिहार की राजधानी पटना के ज्ञान भवन, सम्राट अशोक कनवेंशन में 2 से 11 दिसम्बर 2017 तक आयोजित पुस्तक मेला में आकर्षण केंद्र रहा तक्षशिला पब्लिकेशन एवं इकतारा तक्षशिला का बाल साहित्य एवं कला केन्द्र का तीन दिवसीय कार्यक्रम। कार्यक्रम वत्र्तमान समाज की सोच को एक नई दिशा की ओर ले जाने के उद्देष्य से आयोजित किया गया।

5, 6 एवं 7 दिसम्बर 2017 की पेषकश के प्रथम दिन की शाम पूरी तरह श्री केदारनाथ सिंह जी के नाम समर्पित थी। जिसमें उनके दिल की गिरह को खोलने एवं उनके बचपन की नज़र में बाल साहित्य का क्या स्थान है, क्या-क्या सोच रही थी उनकी, आदि का दायित्व उठा रखा था बिहार के हीं रचनाकार श्री अरूण कमल जी ने। 50 मिनट की इस वार्ता में अनेक रोचक घटनाओं का जिक्र किया उन्होंने और बातों हीं बातों में समय किस तरह पंख लगाकर उड़कर गया, हाॅल में बैठे श्रोता एवं दर्शक जान भी ना पाए और अंत में अरूण कमल जी के आग्रह पर उन्होंने स्वरचित लघु कविता का पाठ भी किया। तक्षशिला पब्लिकेषन एवं इकतारा तक्षशिला बाल साहित्य एवं कला केंद्र की दूसरी पेशकश संध्या 4:00-4:40 केा होनी थी। इस कार्यक्रम का सारा दायित्व दिल्ली पब्लिक स्कूल, पटना के प्राथमिक वर्ग के बच्चों पर टिका था। मंच संचालन से लेकर प्रस्तुति में कक्षा प्रेप से कक्षा पाँच तक के बच्चे शामिल थे। कार्यक्रम का आरंभ बापू के जीवन की दो रोचक घटनाओं के साथ किया गया कि ‘‘गाँधी जी गाँधी कैसे बने? और ‘‘जब गाँधीजी की घड़ी चोरी हो गई’’ उद्देष्यपूर्ण एवं नसीहत देती घटना, ऐसी घटना जिसे लोगों ने शायद सुना भी ना होगा।

फिर तो झड़ी सी लग गई। बच्चों की, बच्चों के लिए ‘प्लूटों पत्रिका में प्रकाशित कविताओं एवं कहानियों की। कक्षा प्रेप के बच्चे अपनी भोली अदा से कविता वाचन किए, वही कक्षा एक एवं दो के बच्चों ने कविताओं एवं कहानियों का अनुपम वाचन किया। अब भला कक्षा तीन के बच्चे क्यों पीछे रहते। उनके स्पष्ट अंदाज में बयां की गई दिल को छूती कहानियों से दर्शकों की आँखें भी नम हो चली थी। कार्यक्रम के समापन पर सबों ने बच्चों के वाचन - कौशल की भूरि-भूरि प्रषंसा की। 7 दिसंबर 2017 को पुनः मंच एक नए विषय को आवाज़ दे रहा था। बिहार की गौरवशाली धरती की महिमा का बखान करने का दायित्व था दिल्ली पब्लिक स्कूल पटना के बच्चों पर। कक्षा छह से बारहवीं तक के कुशल गायकों ने श्रीमती नीलम प्रभा द्वारा रचित एवं लयबद्ध की ‘बिहार प्रशस्ति’ का गायन किया। तदोपरान्त मंच को बिहार के दो उम्दा रचनाकारों को सौंप दिया गया। श्री आलोक धन्वा जी एवं श्री अरूण कमल जी को। इन दोनों रचनाकारों ने हमारे सपनों का समाज एवं बाल साहित्य की भूमिका जैसे नए विषय पर अपनी सोच जाहिर की। उसके बाद तकरीबन दस मिनट का श्रोताओं के साथ एक खुला सत्र हुआ। जिसमें लोगों ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया। बाल साहित्य एवं बच्चों के प्रति अभिभावकों की ज्वलंत समस्याओं का समाधान बताया गया। श्री अरूण कमल जी ने कई एक ऐसी किताबों की चर्चा भी की ,कि वहाँ बैठे दर्शकों को अपना बचपन याद आ गया। इस तरह बाल साहित्य की दिशा में तक्षशिला पब्लिकेशन एवं इकतारा तक्षशिला का बाल साहित्य एवं कला केंद्र का अयोजन बेहद सफल रहा और एक नए विषय पर श्रोताओं को जागरूक करने में कामयाब रहा।

Added on: 11 Dec 2017

Published by: School Admin